एक दिन मैं लिख गया

  • एक शाम मैं बैठा था,
  • किसी ख्याल में डूबा था,
  • उम्र 75 की थी,
  • पर मैं अभी भी था बचपन में,
  • कहीं खोया था,
  • गिन रहा था सब,
  • नदानिया और गुस्ताखियाँ,
  • और बहुत सारी सिसकियाँ
  • दिल कब उदास था ,
  • और कब नाराज़ था,
  • सब याद था
  • फिर जब दौर ये जवानी आया,
  • किसी के इश्क़ का वो पर्चा,
  • फिर याद आया,
  • मैंने फिर याद किया कोशिशों को,
  • दोस्तों की अठखेलियों को,
  • सब याद किया बैठे बैठे,
  • खोया था मैं बचपन में,
  • अकेला था अब इस जीवन में,
  • उदास है मन न जाने कब से,
  • सारी जिंदगी बस चीजें घटते बढ़ते देखा,
  • फिर देखा मेरे बच्चों को तरक्की करते हुये,
  • मैंने न जाने कितने अपनो खोया,
  • पर इन हीरो को सारी जिंदगी सम्हाले रखा,
  • क्यों देखूँ इनकी जिंदगी में अपने अधूरे ख्वाब को पूरा होते,
  • फिर उस शाम के बाद एक दिन मैं लिख गया,
  • मैं लिख गया किसी जरूरत मंद के लिए,
  • कुछ नसीहत लिख गया।

कोई लक्ष्य बनाओ,

कोई वजह तलाश करो,

कोई किताब लिखो,

किसी के प्यार में पड़ जाओ,

जहाँ हो वही देख लो,

हो सकता है तुम्हारा,

हमसफर वहीं मिल जाये,

आने वाले पलों को कुछ इस तरह जी जाओ,

न कोई ख्वाहिश बचे,न कोई अफसोस रहे,

कोई बहाने बनाओ,

कोई गुस्ताखी कर जाओ,

करो बेहिसाब कोशिशें,

कि अपनी मंजिल तक,

आसानी से पहुंच जाओ,

छोटी-छोटी बातों के लिए रूठ जाओ,

बड़ी बड़ी बातों को भूल जाओ,

दोस्त जब मिलें तुम्हें,

कल जो भी हाल था सब भूल जाओ,

कुछ मिला हो या न मिला हो,

हर हाल में मुस्कुराओ,

एक आदत बनाओ ऐसी की,

किसी अजनबी को देखकर मुस्कुराओ,

जो जिंदगी तुमने जी है अब तक,

अब इसके 4 गुना मज़े से जी जाओ,

जियो बेशक जियो,जैसा जीना है तुम्हें,

पर याद से एक लक्ष्य को साथ लेकर चलना है,

थोड़ा खुद को व्यस्त रखो,

अपने पसंदीदा गाने सुनो,

पर ख़ुद को कभी अकेला न छोड़ो,

खाली वक़्त का ऐसा सदुपयोग करो,

अपने परिचितों से मिलो,

या कुछ अच्छा लिखो,

कि एक दिन मिलेगा तुम्हे तुम्हारा आसमाँ

दिल में विश्वास और चेहरे पर हल्की मुस्कान रखो।

झील सी आँखों में डूब जाने दे।

“उसकी झील सी आँखों में डूब जाने का मन करता है,

इस बारिश में भीग जाने का मन करता है,

ये कैसा फितूर चढ़ा है उसके इश्क़ का,

उसकी गैरमौजूदगी में बहते दरिया में डूब जाने का मन करता है”

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